Wednesday, January 14, 2026
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बीएमसी चुनाव से पहले कॉर्पोरेटरों के मानदेय और सुविधाओं पर बढ़ी चर्चा

मुंबई। भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई की देखरेख बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के हाथों में है, जिसे एशिया के सबसे बड़े नगर निकायों में गिना जाता है। विशाल बजट और व्यापक प्रशासनिक दायरे के कारण बीएमसी हमेशा राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में रहती है। खासकर चुनावी मौसम में कॉर्पोरेटरों को मिलने वाले मानदेय, भत्तों और सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो जाती है। महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी 2026 को होने वाले चुनावों के मद्देनज़र बीएमसी एक बार फिर राजनीतिक फोकस में है। राज्य की राजनीति में बीएमसी के नतीजों को ताकत का संकेतक माना जाता है, यही वजह है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस प्रतिष्ठित नगर निकाय में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। बीएमसी में चुने गए कॉर्पोरेटरों को उनके दायित्वों के निर्वहन के लिए मासिक मानदेय दिया जाता है। जुलाई 2017 में इसमें बड़ा संशोधन किया गया था, जिसके तहत मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया। यह बढ़ोतरी महंगाई और जनप्रतिनिधियों पर बढ़ती जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर की गई थी। मानदेय के अलावा कॉर्पोरेटरों को विभिन्न बैठकों में शामिल होने के लिए बैठक भत्ता भी मिलता है। इसमें जनरल बॉडी, स्थायी समिति और अन्य नगर निगम समितियों की बैठकें शामिल हैं। इसके साथ ही नगर निगम मुख्यालय और वार्डों के बीच आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता भी दिया जाता है, जिससे वे अपने निरीक्षण और नागरिक कर्तव्यों को सुचारू रूप से निभा सकें। हर कॉर्पोरेटर को अपने-अपने वार्ड के लिए वार्षिक विकास निधि भी आवंटित की जाती है। इस फंड का उपयोग सड़क मरम्मत, जलापूर्ति सुधार, ड्रेनेज और सीवर व्यवस्था, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइटिंग और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। वार्ड की आबादी, क्षेत्रफल और जरूरतों के आधार पर इस निधि का आकार तय होता है। जमीनी स्तर पर कॉर्पोरेटर नागरिकों और नगर निगम प्रशासन के बीच अहम कड़ी होते हैं। स्थानीय समस्याओं की उनकी समझ और विकास निधि का सही उपयोग वार्डों में प्रत्यक्ष सुधार ला सकता है। ऐसे में चुनाव से पहले कॉर्पोरेटरों की सैलरी और सुविधाओं की जानकारी मतदाताओं के लिए अहम हो जाती है, क्योंकि इससे जवाबदेही, प्रदर्शन और प्रतिबद्धता का आकलन करने में मदद मिलती है। आगामी बीएमसी चुनाव न केवल मुंबई की नागरिक व्यवस्था की दिशा तय करेंगे, बल्कि राज्य की राजनीति में भी इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है।

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