
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक सुनियोजित और समयबद्ध योजना पर कार्य कर रही है। गृह राज्य मंत्री (शहरी) योगेश कदम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में मादक द्रव्यों की बिक्री, परिवहन और खरीद को रोकने के लिए कार्रवाई तेज की जाए और मादक पदार्थ निरोधक कार्रवाई बल (Anti-Narcotics Task Force) को और अधिक सक्रिय एवं कुशल बनाया जाए। उन्होंने गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस बल के क्षेत्रीय कार्यालयों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर कार्यालय शीघ्र शुरू किए जाएं तथा रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए। बैठक में गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनूप कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक (मादक द्रव्य निरोधक बल) शारदा राउत, उप सचिव राहुल कुलकर्णी तथा पुलिस उपायुक्त नवनाथ धावले उपस्थित रहे। बैठक में मंत्री श्री कदम ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ा नियंत्रण आवश्यक है और इस दिशा में समर्पित बलों को आवश्यक संसाधन और स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन बलों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष भत्तों और पदोन्नति हेतु वेतन संशोधन संबंधी प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाए। राज्य मंत्री ने न्यायालयों में लंबित मादक पदार्थों से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटारे की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इन मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और विस्तृत जानकारी समय-समय पर प्रस्तुत की जाए। विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों से मादक द्रव्यों की तस्करी पर चिंता जताते हुए श्री कदम ने कहा कि समुद्री मार्गों से बड़ी मात्रा में ड्रग्स की अवैध आवाजाही हो रही है, जिसे रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए। इस दिशा में कार्य करते हुए तटीय इलाकों में कार्यरत मादक द्रव्य निरोधक बलों को विशेष उपकरणों और तेज रफ्तार वाहनों से सुसज्जित किया जाए। साथ ही इन क्षेत्रों में निगरानी और तलाशी अभियानों की गति और घनत्व दोनों बढ़ाए जाएं। सरकार द्वारा गठित मादक द्रव्य निरोधक कार्यबल को राज्यभर में सक्रिय करने, कार्यालयों की स्थापना, संसाधन उपलब्ध कराने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि महाराष्ट्र सरकार मादक पदार्थों के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। इसके जरिए न केवल युवाओं को इस खतरे से बचाना, बल्कि संगठित तस्करी गिरोहों पर भी कठोर कार्रवाई का संदेश देना है।




