
हेमंत खुटे
मुंबई के 17 वर्षीय प्रतिभाशाली शतरंज खिलाड़ी आरव डेंगला ने कम उम्र में ही उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए भारत के 93वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि फीडे रेटिंग में 2500 अंकों के मापदंड को पूरा करके प्राप्त की। साथ ही, बोस्निया हर्ज़ेगोविना में लगातार दो टूर्नामेंट जीतकर अपना तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म पूरा किया। आरव डेंगला ने निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन, अनुशासन और समर्पण के बल पर भारतीय शतरंज जगत में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का परिणाम है, बल्कि भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत है। भारतीय शतरंज जगत के उभरते हुए प्रतिभाशाली खिलाड़ी आरव डेंगला ने कम उम्र में ही अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय देते हुए ग्रैंडमास्टर का प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया है। आरव ने मात्र 5 वर्ष की आयु में शतरंज खेलना प्रारंभ किया और देखते ही देखते राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। आरव ने वर्ष 2022 में अपना पहला ग्रैंडमास्टर (जी एम) नॉर्म प्राप्त किया। इसके बाद निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने वर्ष 2025 में दूसरा जीएम नॉर्म अर्जित किया। अपने लगातार बेहतर खेल और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अंततः ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल कर भारत को गौरवान्वित किया। आरव की उपलब्धियों में वर्ष 2024 में आयोजित ग्रैंड पेरिस मास्टर्स चैंपियनशिप तथा फीडे वर्ल्ड स्कूल्स रेपिड और ब्लिट्ज चैंपियनशिप में विजेता बनना भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इन प्रतियोगिताओं में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। आरव की इस सफलता के पीछे उनकी माता श्रीमती शिप्रा डेंगला का विशेष सहयोग और प्रोत्साहन रहा है। साथ ही उनके प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन ने भी उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरव डेंगला की यह उपलब्धि न केवल भारतीय शतरंज जगत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है। उनकी यह सफलता यह संदेश देती है कि लगन, परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं।
भारतीय शतरंज के उभरते हुए युवा खिलाड़ी आरव डेंगला ने वर्ष 2024 में इंटरनेशनल मास्टर (आई एम ) का खिताब हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। आरव ने फ्रांस में आयोजित ग्रैंड पेरिस मास्टर्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 राउंड में 7 अंक हासिल किए और आवश्यक मानदंड पूरे किए। अपने सधे हुए खेल, रणनीतिक समझ और धैर्यपूर्ण प्रदर्शन से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया। भारतीय शतरंज के उभरते सितारे आरव डेंगला ने बचपन से ही अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। वर्ष 2016 में मात्र 7 वर्ष की आयु में उन्होंने एम एस एस ए अंडर-10 प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड-तोड़ जीत हासिल की और इस स्पर्धा के सबसे कम उम्र के विजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद भी आरव की सफलता का सिलसिला लगातार जारी रहा। अपनी प्रतिभा, एकाग्रता और रणनीतिक समझ के बल पर वे महज 13 वर्ष की उम्र तक अंडर-13 आयु वर्ग में दुनिया के शीर्ष 5 खिलाड़ियों में शामिल रहे। किसी भी शतरंज खिलाड़ी के लिए ग्रैंडमास्टर (जीएम) का खिताब हासिल करना लंबी मेहनत, निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में अपनी क्षमता साबित करने का परिणाम होता है। आरव डेंगला ने भी इसी कठिन और प्रतिष्ठित यात्रा को सफलतापूर्वक तय करते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन कर अपने तीनों जीएम नॉर्म अर्जित किए।
उन्हें पहला जीएम नॉर्म 2022 में बोस्निया और हर्ज़ेगोविना में आयोजित मेडजुनारोदनी वेलेमाजस्टोर्स्की टूर्नामेंट में प्रभावशाली प्रदर्शन करने पर हासिल हुआ। दूसरा जीएम नॉर्म 2025 में क्रोएशिया में आयोजित जुपान्या सेलिब्रेट्स चेस जीएम-नॉर्म राउंड रॉबिन प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाने पर मिला और तीसरा जीएम नॉर्म 2026 बोस्निया और हर्ज़ेगोविना में आयोजित जीएम मिक्स बिजेलजिना टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ मिला । तब आरव ने तीसरा और अंतिम जीएम नॉर्म प्राप्त कर ग्रैंडमास्टर बनने की दिशा में अपनी यात्रा पूरी की।
भारतीय शतरंज के युवा ग्रैंडमास्टर आरव डेंगला की रेटिंग यात्रा उनके निरंतर परिश्रम, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन की कहानी को दर्शाती है। कम उम्र से ही उन्होंने हर वर्ष अपने खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।
अभी आरव को क्लासिकल शतरंज में 2506, रेपिड शतरंज में 2200 और ब्लिट्ज शतरंज में 2304 रेटिंग प्राप्त है। आरव ने यह रेटिंग यात्र लगातार अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और मजबूत मानसिक दृढ़ता से विश्व स्तर तक अपनी विशिष्ट पहचान बना कर हासिल की है। भारतीय शतरंज के उभरते हुए खिलाड़ी आरव डेंगला ने अपने खेल को सर्वोच्च स्तर तक पहुँचाने के लिए पढ़ाई के साथ भी संतुलन बनाते हुए सोच-समझकर सटीक निर्णय लिया। वर्तमान में वे शिक्षा के लिए अमेरिका के एक प्रतिष्ठित स्कूल से जुड़े हुए हैं। आरव ने फिलिप्स एकेडमी (अमेरिका) में अध्ययन किया है, और वर्ष 2025-26 में उन्होंने एक गैप ईयर लिया, ताकि वे पूरी तरह से शतरंज पर ध्यान केंद्रित कर सकें और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इससे पहले आरव धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल, मुंबई (भारत) के छात्र भी रह चुके हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शतरंज के प्रति उनका यह समर्पण उनके बड़े लक्ष्य और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। हर बड़ी सफलता के पीछे किसी न किसी का मौन त्याग छिपा होता है। भारतीय ग्रैंडमास्टर आरव डेंगला की उपलब्धियों के पीछे उनकी माता श्रीमती शिप्रा डेंगला का भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। अपने बेटे की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्होंने उसके शतरंज करियर को आगे बढ़ाने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी, ताकि वे पूरा समय उसके प्रशिक्षण, टूर्नामेंट और तैयारी में दे सकें। एक माँ के रूप में उनका यह त्याग और समर्पण ही आरव की सफलता की मजबूत नींव बना। उनकी यह बलिदान इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि माता-पिता का विश्वास और समर्थन किसी भी खिलाड़ी को ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। आरव डेंगला की ग्रैंडमास्टर बनने की यात्रा केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह निरंतर परिश्रम, अनुशासन, सही मार्गदर्शन और परिवार के त्याग का प्रेरक उदाहरण भी है। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि दृढ़ संकल्प और सतत अभ्यास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भारतीय शतरंज को एक और गौरवपूर्ण क्षण दिया है और देश के युवा खिलाड़ियों के लिए नई प्रेरणा जगाई है। निश्चित रूप से आरव डेंगला आने वाले समय में भारतीय शतरंज को विश्व मंच पर और अधिक ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।




