Monday, January 12, 2026
Google search engine
HomeEntertainmentश्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा का भव्य रंगमंचीय अनुभव: ‘मेरे कृष्ण’

श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा का भव्य रंगमंचीय अनुभव: ‘मेरे कृष्ण’

भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य, मानवीय और दार्शनिक यात्रा को मंच पर जीवंत करने वाली भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति ‘मेरे कृष्ण’ दर्शकों को एक गहन आध्यात्मिक और कलात्मक अनुभव प्रदान करने जा रही है। इस नाटक में लोकप्रिय अभिनेता सौरभ राज जैन श्रीकृष्ण की भूमिका में, पूजा बी शर्मा राधा एवं महामाया के द्वैत रूप में, जबकि अर्पित रांका दुर्योधन और कंस जैसे सशक्त नकारात्मक पात्रों में नजर आएंगे। नाटक का निर्देशन राजीव सिंह दिनकर ने किया है, जबकि इसका निर्माण विवेक गुप्ता, राजीव सिंह दिनकर एवं विष्णु पाटिल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। नाटक के लेखक डॉ. नरेश कात्यायन हैं और इसका मौलिक एवं भावप्रवण संगीत उद्भव ओझा द्वारा रचित है। ‘मेरे कृष्ण’ में वृंदावन में श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर द्वारका में उनके अंतिम क्षणों तक की यात्रा को मंचित किया गया है। लगभग 2 घंटे 45 मिनट की अवधि वाला यह नाटक 20 जीवंत दृश्यों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख अध्यायों को दर्शाता है। शाश्वत दर्शन में निहित होते हुए भी इसकी कथा शैली समकालीन, मनोरंजक और दृश्यात्मक रूप से अत्यंत समृद्ध है। नाट्यकला, संगीत, नृत्य और मल्टीमीडिया के प्रभावी समन्वय से यह प्रस्तुति भावनात्मक रूप से दर्शकों को गहराई से छूती है। विशेष बात यह है कि नाटक में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कुछ कम ज्ञात प्रसंगों और दृष्टिकोणों को भी उजागर किया गया है। इस नाटक के प्रत्येक दृश्य को गतिमान चित्रकला की तरह परिकल्पित किया गया है, जहाँ रंगमंच, दृश्य कला और आध्यात्मिक अन्वेषण एक-दूसरे में विलीन होते प्रतीत होते हैं। नाटक का मूल उद्देश्य दर्शकों को यह प्रश्न लेकर लौटने के बजाय यह अनुभूति देना है कि “श्रीकृष्ण कौन हैं?” नहीं, बल्कि “श्रीकृष्ण मेरे भीतर सदैव हैं। निर्देशक राजीव सिंह दिनकर के अनुसार, ‘मेरे कृष्ण’ की स्वर-शैली काव्यात्मक होने के साथ-साथ आधुनिक है। यह नाटक दार्शनिक होते हुए भी पूरी तरह मनोरंजक है और इसका उद्देश्य पूजा-पद्धति पर नहीं, बल्कि चेतना, आत्मबोध और जन-जागरण पर संवाद स्थापित करना है। लोकहित में देश की जनता के बीच एक वैचारिक और आध्यात्मिक संवाद को जागृत करने का यह प्रयास, ‘मेरे कृष्ण’ को केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभव बना देता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments