
मुंबई। एमएचबी पुलिस ने खुद को दिल्ली का आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों को ठगने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान नीलेश काशीराम राठौड़ के रूप में हुई है, जो कई धोखाधड़ी के मामलों में वांटेड था। पुलिस जांच में इस गिरोह के दो अन्य सदस्यों—सचिन कृष्णा सावंत और करण सिंघानिया की संलिप्तता भी सामने आई है, जिन्हें फिलहाल वांटेड घोषित किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम वसूल करता था। इस मामले में शिकायतकर्ता प्रकाश नरेंद्र उदेशी हैं, जो दहिसर में अपने परिवार के साथ रहने वाले एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं और दहिसर के साई कृपा मॉल में उनका निजी कार्यालय है। उदेशी पिछले तीन वर्षों से सचिन सावंत को जानते थे। सावंत ने ही उनकी मुलाकात नीलेश राठौड़ से कराई थी, जिसे उसने दिल्ली में रहने वाला आईपीएस अधिकारी बताया और दावा किया कि उसके गृह मंत्रालय में गहरे संपर्क हैं। सावंत ने उदेशी को भरोसा दिलाया कि वह पहले भी कई युवाओं को सरकारी नौकरी दिला चुका है और अगर नौकरी नहीं मिली तो पूरी रकम ब्याज सहित लौटा दी जाएगी। इसके बाद उदेशी ने राठौड़ से मुलाकात की। यह मुलाकात सांताक्रूज स्थित आईटीसी ग्रैंड मराठा होटल में हुई, जहां राठौड़ के साथ करण सिंघानिया भी मौजूद था। बातचीत के बाद आरोपी ने उदेशी के बेटे के लिए नौकरी का आवेदन फॉर्म भरवाया और कम से कम 10 लाख रुपये की मांग की। समझौते के तहत उदेशी ने किश्तों में 8 लाख रुपये राठौड़ और सिंघानिया को दिए। कुछ समय बाद उनके बेटे को मेडिकल जांच के लिए जेजे अस्पताल भेजा गया। मेडिकल के बाद आरोपियों ने दावा किया कि नौकरी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही बेटे को ओडिशा में सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट में ज्वाइनिंग मिलेगी। 29 नवंबर 2023 को राठौड़ ने उदेशी को फोन कर बेटे को ओडिशा लाने को कहा, जहां नौकरी से जुड़े कामों के लिए कई अन्य युवक भी पहुंचे हुए थे। बाद में यह कहकर उन्हें वापस भेज दिया गया कि ज्वाइनिंग दिसंबर में होगी। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही कोई आधिकारिक नियुक्ति पत्र। नवंबर 2024 में राठौड़ ने एक कथित मूवमेंट ऑर्डर की कॉपी दिखाकर शेष 2 लाख रुपये की मांग की। उदेशी ने पैसे देने से इनकार कर दिया और पहले से दिए गए 8 लाख रुपये वापस मांगे। इसके बावजूद न तो रकम लौटाई गई और न ही नौकरी मिली। बाद में जांच करने पर सामने आया कि नौकरी से जुड़े सभी दस्तावेज़ नकली थे।
इसके बाद उदेशी ने राठौड़, सावंत और सिंघानिया के खिलाफ एमएचबी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने दिल्ली में छापा मारकर नकली आईपीएस अधिकारी बने नीलेश राठौड़ को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में राठौड़ ने स्वीकार किया कि उसने सचिन सावंत और करण सिंघानिया के साथ मिलकर इस ठगी को अंजाम दिया। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि राठौड़ ने आईपीएस अधिकारी बनकर कितने लोगों को ठगा और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कुल कितनी रकम वसूली गई।



