
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ स्वीकारोक्ति करते हुए यह मान लिया है कि राज्य सरकार और स्थानीय निकायों द्वारा लगाए गए कर और शुल्क ही मुंबई जैसे महानगरों में तेजी से बढ़ती आवास लागत के पीछे का एक बड़ा कारण हैं। यह बात खुद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से कही है। शिंदे, जो आवास और शहरी विकास विभाग के भी प्रमुख हैं, ने माना कि सरकार द्वारा लगाई गई विविध वैधानिक लागतें फ्लैटों की कीमतों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि आवासीय निर्माण की लागत में जीएसटी, निर्माण श्रमिक उपकर, रॉयल्टी शुल्क, बीमा, और स्थानीय निकायों (विशेष रूप से बीएमसी) द्वारा वसूले जाने वाले बढ़े हुए प्रीमियम शामिल हैं, जो सीधे तौर पर अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करते हैं। विधायक सतेज पाटिल, भाई जगताप, अभिजीत वंजारी और अन्य 13 विधायकों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में शिंदे ने स्पष्ट किया कि आवास परियोजनाओं में करीब 30 प्रतिशत लागत अंतर देखा जा रहा है यानी निर्माण लागत और बाजार मूल्य के बीच का बड़ा अंतर, जिसका एक हिस्सा सरकारी शुल्कों की वजह से है। यह बिल्डरों को अप्रत्यक्ष रूप से अत्यधिक लाभ दिला रहा है।
रेडी रेकनर दरें भी एक मुद्दा
इस चर्चा के दौरान, रेडी रेकनर (RR) दरों में हालिया बढ़ोतरी का भी मुद्दा उठाया गया। शिंदे ने कहा कि 2022-23 के बाद पहली बार 2024 में मुंबई की रेडी रेकनर दरों में 4.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि RR दरें बाजार दरों से काफी कम होती हैं, लेकिन इनकी वृद्धि भी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को बढ़ाकर मकानों को महंगा बनाती है।
म्हाडा का सस्ता विकल्प
हालांकि शिंदे ने यह भी बताया कि म्हाडा (म्हाड़ा) जैसी सरकारी एजेंसियां सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 में मुंबई में 2,030 म्हाडा फ्लैट्स ऐसे बेचे गए जो मौजूदा बाजार दरों से 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत कम कीमत पर थे। यह सरकार के किफायती आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को दर्शाता है। यह स्वीकारोक्ति कि खुद सरकार और स्थानीय निकाय फ्लैट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का एक कारण हैं, बेहद अहम है। इससे आवास संकट के समाधान में सरकारी नीतियों की भूमिका पर सवाल उठता है।




