
मुंबई। महाराष्ट्र में नदियों के बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और उनके संरक्षण व पुनरुद्धार के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में ‘महाराष्ट्र राज्य नदी पुनरूज्जीवन प्राधिकरण’ के गठन को मंजूरी दी गई। यह प्राधिकरण नदियों के संरक्षण के लिए नियामक और विकासात्मक दोनों स्तरों पर काम करेगा। राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना की तर्ज पर गठित इस प्राधिकरण के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होंगे, जबकि उपाध्यक्ष पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री होंगे। इसके अलावा वित्त, नगर विकास, जलसंपदा, उद्योग तथा ग्राम विकास एवं पंचायती राज मंत्री इसके सदस्य होंगे, वहीं पर्यावरण विभाग के सचिव सदस्य-सचिव की भूमिका निभाएंगे। राज्य में नर्मदा, तापी, गोदावरी और कृष्णा जैसी प्रमुख नदियां बहती हैं, लेकिन बढ़ते प्रदूषण ने कई नदी तंत्रों को गंभीर संकट में डाल दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 296 प्रदूषित नदी पट्टे हैं, जिनमें से सर्वाधिक 54 महाराष्ट्र में हैं। इन प्रदूषित नदी क्षेत्रों में मिठी, मुळा, मुळा-मुठा, भीमा, पवना, नाग, चंद्रभागा और पंचगंगा जैसी नदियां शामिल हैं। नए प्राधिकरण को इन 54 नदी पट्टों के पुनरुद्धार के लिए चरणबद्ध प्राथमिकता तय करने, विभिन्न योजनाओं का समन्वय करने और प्रभावी नीति लागू करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके तहत सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, नदी किनारे अतिक्रमण रोकने और नदी क्षेत्र सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। प्राधिकरण विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा, जनजागरूकता बढ़ाएगा और नदी घाटी प्रबंधन योजनाओं को लागू करेगा। साथ ही भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण, बिजली आपूर्ति और अनुबंध संबंधी समस्याओं का समाधान भी करेगा। इसमें बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और मैंग्रोव सेल जैसी संस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा। वित्तीय व्यवस्था के तहत इस प्राधिकरण के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये का फंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से जुटाया जाएगा, जबकि राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये का योगदान देगी। इसके अलावा गौण खनिज उत्खनन से प्राप्त राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा हर साल प्राधिकरण को दिया जाएगा। कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और अन्य वित्तीय संस्थानों के सहयोग से भी फंड जुटाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह प्राधिकरण राज्य में नदियों के पुनर्जीवन, पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम साबित होगा।




