
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने और हर गांव तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से ‘माझं गाव, आरोग्यसंपन्न गाव’ अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। यह राज्यव्यापी अभियान 1 अप्रैल से शुरू होगा। यह पहल देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और अजित पवार के मार्गदर्शन में चलाई जाएगी। वहीं प्रकाश आबिटकर और मेघना साकोरे बोर्डीकर इसके क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जनभागीदारी पर जोर
राज्य सरकार का उद्देश्य इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनभागीदारी के माध्यम से एक व्यापक स्वास्थ्य आंदोलन में बदलना है। इसके तहत हर गांव को “आरोग्यसंपन्न” बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे गांव से लेकर राज्य स्तर तक स्वास्थ्य तंत्र मजबूत होगा।
इलाज से ज्यादा रोकथाम पर फोकस
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें इलाज के बजाय बीमारियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, सीवेज प्रबंधन और पोषण जैसे बुनियादी पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को भी अभियान में शामिल किया गया है।
‘आरोग्यसंपन्न गांव’ को मिलेगा सम्मान
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए राज्य, जिला और ग्राम स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। निर्धारित मानकों के आधार पर 70% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले गांवों को “आरोग्यसंपन्न गांव” का दर्जा दिया जाएगा। ऐसे गांवों को प्रमाणपत्र, स्मृति चिन्ह और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
80.75 करोड़ का बजट, करोड़ों के पुरस्कार
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए राज्य सरकार ने 80.75 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।
जिला परिषद स्तर पर प्रथम पुरस्कार: 5 करोड़ रुपये। द्वितीय: 3 करोड़ रुपये। तृतीय: 2 करोड़ रुपये।
पंचायत समिति स्तर पर भी 2 करोड़, 1.5 करोड़ और 1.25 करोड़ रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे।
इसके अलावा ग्रामीण अस्पताल, उपजिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपकेंद्रों को भी लाखों रुपये तक के पुरस्कार दिए जाएंगे। गांवों को जिला, विभाग और राज्य स्तर पर क्रमशः 25 लाख, 1 करोड़ और 5 करोड़ रुपये तक के पुरस्कार मिलेंगे। यह अभियान हर साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलाया जाएगा, जिससे गांवों को लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करने और पुरस्कार हासिल करने का अवसर मिलेगा। यह पहल ग्रामीण महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सुधार और जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है।




