Sunday, February 22, 2026
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कृषि में ‘ट्रेसिबिलिटी’ और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी: एन.रामास्वामी

मुंबई। वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ‘ट्रेसिबिलिटी’ (शोधक्षमता) प्रणाली को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में लागू करना आवश्यक है। यह मत पशुसंवर्धन, दुग्ध व्यवसाय और मत्स्य व्यवसाय विभाग के सचिव एन. रामास्वामी ने व्यक्त किया। वे ‘महाराष्ट्र कृषि-कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति 2025-2029’ के अंतर्गत आयोजित ‘वैश्विक कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन एवं निवेशक शिखर सम्मेलन – एआई फॉर एग्री 2026’ में ‘कृषि-एआई के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ विषय पर आयोजित परिसंवाद को संबोधित कर रहे थे। इस सत्र में ट्रस्ट ज़ीरो वन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रबीर मिश्रा, आईआईएमडीए ट्रेड ट्रस्ट (सिंगापुर) के उपनिदेशक चेंग केन वेई, बेटर कॉटन इंडिया की निदेशक श्रीमती ज्योति नारायण कपूर, जर्मनी दूतावास के कृषि एवं खाद्य विभाग प्रमुख वोल्कर क्लिमा तथा रबर बोर्ड के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम. वसंतगेसेन सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया।
एआई से कृषि में उत्पादकता और आय वृद्धि संभव
विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना आवश्यक है। कृषि क्षेत्र में उत्पादकता वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाने और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक प्रभावी परिवर्तनकारी साधन सिद्ध हो सकती है। हालांकि, एआई का प्रभावी उपयोग केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित न रहकर मापनीय परिणामों और किसानों की वास्तविक आय वृद्धि से जुड़ा होना चाहिए। सामान्य तकनीकी समाधानों के बजाय फसल-विशिष्ट और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने पर बल दिया गया।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर
परिसंवाद में शासन, निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और वित्तीय संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। डेटा-आधारित प्रणालियों के माध्यम से ऋण उपलब्धता और मूल्य श्रृंखला की दक्षता बढ़ाई जा सकती है। एकीकृत कृषि मूल्य श्रृंखला के निर्माण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को प्रभावी माध्यम बताया गया।व्यापक पारिस्थितिकी दृष्टिकोण आवश्यक
विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में एआई का व्यापक और सतत उपयोग तभी संभव है, जब समग्र पारिस्थितिकी दृष्टिकोण अपनाया जाए। संयुक्त अनुसंधान, संस्थागत सहयोग और दीर्घकालिक निवेश इसके लिए आवश्यक हैं। महाराष्ट्र की एआई-सक्षम कृषि नीति में जनसंख्या स्तर पर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई। साथ ही, वैश्विक व्यापार और स्थिरता मानकों के अनुरूप खुली और परस्पर-संगत प्रणालियों के विकास पर भी जोर दिया गया। डेटा सुरक्षा, कानूनी मान्यता और इंटरऑपरेबिलिटी को इस दिशा में प्रमुख स्तंभ माना गया। सत्र का संचालन वैश्विक एआई रणनीतिकार विकास कानुंगो ने किया, जबकि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने कृषि प्रौद्योगिकी की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

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