
इंद्र यादव
मुंबई। मुंबई के ‘फेफड़ों’ कहे जाने वाले संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) को अतिक्रमण मुक्त करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। बॉम्बे हाईकोर्ट के 28 वर्ष पुराने आदेश को लागू करने के लिए वन विभाग अब ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहा है। यह कार्रवाई जनहित याचिका क्रमांक 305/1995 में 7 मई 1997 को दिए गए हाईकोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के अनुपालन में की जा रही है। अदालत ने उस समय राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों को हटाने और पात्र निवासियों के पुनर्वास के निर्देश दिए थे। अब सरकार पार्क की सीमाओं के भीतर रह रहे शेष अतिक्रमणकारियों की अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया में जुटी है।
सरकार की रणनीति: पहचान, सत्यापन और पुनर्वास
वन विभाग द्वारा जारी सार्वजनिक अपील के अनुसार पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
पार्क क्षेत्र में मौजूद सभी अवैध ढांचों और परिवारों का सर्वे कर सटीक सूची तैयार की जा रही है।
केवल वे ही लोग पुनर्वास के पात्र होंगे, जो सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों और कोर्ट के कट-ऑफ प्रावधानों को पूरा करते हैं।
सूची अंतिम होते ही पात्र परिवारों को उद्यान क्षेत्र के बाहर स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि वन क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वन विभाग के अनुसार यह अभियान केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई के पर्यावरण संरक्षण और न्यायालय के आदेशों के सम्मान से भी जुड़ा है।
जनता और निवासियों के लिए संदेश
विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरी कार्रवाई कानूनी दायरे में और सुव्यवस्थित तरीके से की जाएगी। संबंधित निवासियों से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें और प्रक्रिया में सहयोग करें। इस पहल से जहां हजारों एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का मार्ग प्रशस्त होगा, वहीं वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक गलियारा भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।




