Wednesday, February 18, 2026
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‘एआई’ केवल तकनीक नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति के किसान को सशक्त बनाने का साधन: निवासी आयुक्त आर विमला

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में महाराष्ट्र के कृषि प्रयोगों की सराहना

नई दिल्ली। भारत की डिजिटल क्रांति को नई दिशा देने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के द्वितीय सत्र में आज महाराष्ट्र शासन की अभिनव कृषि पहलों ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में महाराष्ट्र सदन की निवासी आयुक्त एवं सचिव आर. विमला ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर राज्य के कृषि विभाग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग से कृषि क्षेत्र में आए परिवर्तन पर आधारित ‘एग्रीकल्चर कंपेंडियम’ (विशेष सफलता गाथा संग्रह) पुस्तक का विमोचन किया गया। वैश्विक मंच को संबोधित करते हुए आर. विमला ने इस उपलब्धि का श्रेय नेतृत्व को देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दूरदर्शी नेतृत्व तथा कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र कृषि-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि एआई केवल अत्याधुनिक तकनीक नहीं है, बल्कि अंतिम पंक्ति के किसान को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। महाराष्ट्र शासन ने इस तकनीक को सीधे खेत तक पहुंचाकर कृषि को आधुनिक, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने का सफल प्रयास किया है। राज्य के कृषि प्रयोगों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने ‘महाराष्ट्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड एग्रीटेक इनोवेशन सेंटर’ के कार्य की विशेष सराहना की। इस केंद्र द्वारा संकलित 26 क्रांतिकारी केस स्टडी इस सत्र का प्रमुख आकर्षण रहीं। ‘महाविस्तार’ एआई प्रणाली का लाभ वर्तमान में 22 लाख से अधिक किसान उठा रहे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की अशिक्षित महिला किसानों के लिए स्थानीय मराठी बोली में उपलब्ध ‘वॉयस-फर्स्ट’ संवाद सुविधा एक महत्वपूर्ण सामाजिक और तकनीकी परिवर्तन सिद्ध हुई है। इस सफलता संग्रह में ‘वसुधा’ और ‘निओपर्क’ जैसे पोर्टेबल उपकरणों के माध्यम से खेत पर ही 90 प्रतिशत सटीकता के साथ मिट्टी परीक्षण, उपग्रह चित्रों के आधार पर फसल स्वास्थ्य की निगरानी तथा ‘सैटसोर्स’ तकनीक के माध्यम से किसानों का डिजिटल क्रेडिट स्कोर तैयार कर एक ही दिन में संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का भी विश्लेषण किया गया है। इन तकनीकों के परिणामस्वरूप राज्य के 40 हजार से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों को 1,700 मिलियन रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनकी उत्पादकता में 20 से 32 प्रतिशत तक उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।इस सत्र में केंद्र सरकार के वरिष्ठ सचिवों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों तथा वैश्विक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ मॉडल की सराहना की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना ‘कल्याण हेतु एआई’ नीति का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन इस सम्मेलन में प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित हुआ। जलवायु अनुकूलन, उपग्रह डेटा और सतत कृषि पद्धतियों के समन्वय से महाराष्ट्र तकनीक के माध्यम से कृषि समृद्धि की दिशा में अग्रसर है, ऐसा विश्वास इस अवसर पर व्यक्त किया गया। इस सत्र में विश्व बैंक (भारत) के प्रभारी कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी, कृषि विभाग के निदेशक जे.पी. त्रिपाठी तथा भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सुश्री शिखा दहिया ने उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया।

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