क्या गुटखा माफियाओं से याराना निभा रहे हैं आईबी के अधिकारी?
सहायक आयुक्तों ने सह आयुक्त विजिलेंस को लिखा पत्र

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गुटखा और सुगंधित तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इस प्रतिबंध को प्रभावी रूप से लागू कराने की जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की है, जिसमें इंटेलिजेंस (आईबी) विभाग की अहम भूमिका गुप्त जानकारी जुटाकर गुटखा माफियाओं के नेटवर्क पर कार्रवाई करना है। हालांकि, ठाणे डिवीजन में कार्यरत आईबी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में ठाणे आईबी विभाग में तैनात खाद्य सुरक्षा अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करने में असफल रहे, जबकि ठाणे में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की गई। आरोप हैं कि आईबी के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्यशैली गुटखा माफियाओं के प्रति नरम रही, वहीं कार्रवाई के नाम पर कुछ वैध खाद्य व्यापारियों को परेशान किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इन शिकायतों की जांच सह आयुक्त (विजिलेंस) स्तर पर की जा रही है। वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ठाणे के सहायक आयुक्तों ने गुटखा को लेकर आईबी में कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली को गंभीरता से लेते हुए एफडीए के सह आयुक्त (विजिलेंस) को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों का कारोबार संगठित और जोखिमपूर्ण होता है, इसलिए प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत खुफिया तंत्र और समय पर गोपनीय जानकारी अत्यंत आवश्यक है। साथ ही आईबी विभाग को नियमित रूप से आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने और संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है। स्वर्णिम प्रदेश को मिली शिकायतों में दावा किया गया है कि ठाणे आईबी में कार्यरत खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी संदिग्ध एवं कथित रूप से अवैध कार्रवाई की गई है। इन मामलों की शिकायत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, लोकायुक्त, एफडीए मंत्री और एफडीए आयुक्त तक पहुंचाई गई है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होने से प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि आईबी विभाग में तैनात अधिकारी सह आयुक्त (विजिलेंस) को रिपोर्ट करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि गुटखा माफियाओं के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाइयों की समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं हुई। अब नजर इस बात पर टिकी है कि सहायक आयुक्तों द्वारा भेजे गए पत्र पर उच्च स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या प्रतिबंधित गुटखा कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है या यह मामला भी प्रशासनिक फाइलों तक सीमित रह जाएगा।




