Wednesday, February 4, 2026
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नवी मुंबई में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर एडवोकेट ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर का लोकार्पण

मुंबई। महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल द्वारा स्थापित भारत के पहले ‘भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर एडवोकेट ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर’ (बीबीएटीआरसी) का शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नवी मुंबई में लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार न्यायाधीशों के लिए प्रशिक्षण अकादमी है, उसी तरह वकीलों के लिए भी अलग प्रशिक्षण अकादमी होनी चाहिए थी, जिसका उत्तर अब बार काउंसिल ने इस ऐतिहासिक पहल के माध्यम से दिया है। यह अकादमी कानून की पढ़ाई और वास्तविक न्यायालयीन कार्य (कोर्ट क्राफ्ट) के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तळोजा स्थित इस अकादमी का उद्घाटन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण आर. गवई के हाथों संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने की। इस अवसर पर मेघालय उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अ‍ॅड. अनिल सी. सिंग, महाराष्ट्र के महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे तथा गोवा के महाधिवक्ता अ‍ॅड. देविदास पांगम प्रमुख रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने विधि प्रशिक्षण और शोध को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई भूमि का अत्यंत प्रभावी उपयोग करते हुए कम समय में यह उत्कृष्ट भवन निर्मित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस भवन का गुणवत्तापूर्ण और तीव्र निर्माण दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार की कार्यशैली की याद दिलाता है और इस अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि वकीलों के लिए अलग प्रशिक्षण अकादमी शुरू करने का यह निर्णय देश में पहला है। बदलते कानून, नए आपराधिक कानूनों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक के उपयोग के लिए प्रशिक्षित वकील और अभियोजक तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अकादमी के लिए राज्य सरकार की ओर से 10 करोड़ रुपये का अनुदान आगामी बजट सत्र के बाद वितरित किया जाएगा। उन्होंने एआई के माध्यम से याचिका ड्राफ्टिंग में संभावित जोखिमों के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि बिना शोध के गुणवत्ता संभव नहीं है। यह रिसर्च सेंटर भविष्य में उच्च स्तरीय कानूनी शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया। कार्यक्रम की प्रस्तावना वरिष्ठ वकील तथा बीसीएमजी के अध्यक्ष हर्षद निंबाळकर ने की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के हाथों न्यायमूर्ति बी.बी. चव्हाण को ‘विधि महर्षि पुरस्कार’ प्रदान किया गया। वहीं अमरावती के दिवाणी वकील ज्ञानेश्वर बावरेकर को मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया, जिसे उनके पुत्र अ‍ॅड. संजय बावरेकर ने स्वीकार किया। इस समारोह में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा के उपाध्यक्ष अ‍ॅड. जयंत डी. जायभावे, बीबीएटीआरसी के अध्यक्ष अ‍ॅड. डॉ. उदय पी. वारुंजीकर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य अ‍ॅड. आशिष पी. देशमुख सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता, पदाधिकारी और गणमान्य उपस्थित थे।

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