Sunday, February 22, 2026
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मराठी भाषा केवल संवाद नहीं, हजारों वर्षों की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा: डॉ.किरण कुलकर्णी

अभिजात दर्जे से शोध, अनुवाद और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

मुंबई। मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से निरंतर बहती एक सांस्कृतिक नदी है। यह विचार मराठी भाषा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी ने व्यक्त किए। वे रविवार को महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से पु.ल.देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी द्वारा आयोजित ‘व्याख्यानमाला’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। डॉ. कुलकर्णी ने मराठी को प्राप्त अभिजात भाषा के दर्जे के महत्व, उसके ऐतिहासिक विकास और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य विभाग की उपसचिव नंदा राऊत, पु.ल.देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी की संचालक मीनल जोगळेकर, सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. शिरीष ठाकूर, मराठी भाषा के विद्वान और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलना केवल औपचारिक सम्मान नहीं है, बल्कि इससे केंद्र सरकार की विशेष योजनाओं के माध्यम से भाषा के विकास, शोध और संरक्षण के लिए नई संभावनाएं सृजित होंगी। महाराष्ट्री प्राकृत, अपभ्रंश और आधुनिक मराठी के भाषाई प्रवास का उल्लेख करते हुए उन्होंने वररुचि के ‘प्राकृतप्रकाश’ ग्रंथ का संदर्भ दिया और मराठी की प्राचीनता के प्रमाण प्रस्तुत किए। ज्ञानेश्वरी, लीळाचरित्र, संत साहित्य और 19वीं सदी की आधुनिक मराठी परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने मराठी की सृजनशीलता और मौलिकता को रेखांकित किया। डॉ. कुलकर्णी ने यह भी कहा कि ज्ञानेश्वर-पूर्व लगभग डेढ़ हजार वर्षों की भाषिक और लिखित परंपरा पर अपेक्षित शोध अब तक कम हुआ है, जिस पर आगे गंभीर कार्य करने की आवश्यकता है। अभिजात भाषा योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना फरवरी–मार्च तक जारी होने की संभावना है। उन्होंने अमरावती में आयोजित 11 अभिजात भाषाओं की परिषद का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘भाषिणी’ ऐप के माध्यम से मराठी भाषण का अन्य भाषाओं में तत्काल अनुवाद कर तकनीक के जरिए भाषाई संवाद का नया मार्ग प्रशस्त किया गया है। मराठी के संवर्धन, शोध, अनुवाद और रोजगार सृजन के क्षेत्र में अगले एक वर्ष में ठोस लक्ष्य पूरे करने का संकल्प व्यक्त करते हुए उन्होंने समाज के सभी वर्गों से मराठी के भविष्य के निर्माण में सक्रिय सहभाग की अपील की।

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