
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद पर सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने इस मामले की सुनवाई अब 23 जनवरी, शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी है। यह इस प्रकरण की अंतिम सुनवाई मानी जा रही है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति और स्थानीय निकायों के शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि शिवसेना के दोनों गुटों- उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट—के वकीलों को अंतिम सुनवाई में बहस के लिए कुल पांच घंटे का समय दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि शुक्रवार को सुबह 11 बजे से इस मामले पर सुनवाई शुरू की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट शिवसेना के साथ-साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपना फैसला सुनाएगा। दोनों मामलों को महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इसी बीच, महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले पर भी बुधवार को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन वह मामला अदालत के समक्ष पेश नहीं हो सका। इसके चलते इस पर भी सुनवाई टाल दी गई है। कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जिन 57 स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो गया है, वहां चुनाव परिणाम सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे। इन 57 स्थानीय निकायों में राज्य के 40 नगर निगम और 17 नगर पंचायतें शामिल हैं। ऐसे में शिवसेना, राकांपा और ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों पर आने वाले फैसलों का महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।




