Sunday, February 8, 2026
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आईआईटी दिल्ली में सुनीता विलियम्स का प्रेरक संबोधन

अंतरिक्ष सिर्फ विज्ञान नहीं, आत्म-खोज की यात्रा है: सुनीता विलियम्स

नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रेरणा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब नासा की सेवानिवृत्त अंतरिक्ष यात्री और अमेरिकी नौसेना की सेवानिवृत्त कैप्टन सुनीता एल. विलियम्स ने छात्रों के साथ अपने अंतरिक्ष अनुभव साझा किए। डोगरा हॉल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वीडियो के माध्यम से अंतरिक्ष में बिताए अपने पल दिखाए और छात्रों को यह महसूस कराया कि अंतरिक्ष केवल तारों और ग्रहों का अध्ययन नहीं, बल्कि स्वयं को समझने का माध्यम भी है। अपने व्याख्यान ‘The Making of an Astronaut: Sunita Williams’ Story’ में सुनीता विलियम्स ने कहा कि मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए वर्तमान समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि हर अंतरिक्ष मिशन में चुनौतियां और उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन यही अनुभव भविष्य की कठिनाइयों के लिए हमें मजबूत बनाते हैं। उनकी हालिया अंतरिक्ष यात्रा एक्सपीडिशन 71/72 से जुड़े अनुभवों ने श्रोताओं को अंतरिक्ष की वास्तविकताओं से रूबरू कराया। अंतरिक्ष मिशनों की जटिलताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार अत्यधिक तकनीक और बैकअप सिस्टम होने के बावजूद समाधान बहुत सरल होता है। जरूरत सिर्फ यह होती है कि समस्या को ध्यान से देखा और समझा जाए। उन्होंने इसे जीवन से जोड़ते हुए कहा कि यही सिद्धांत दैनिक जीवन में भी लागू होता है। शून्य गुरुत्वाकर्षण के अनुभव को साझा करते हुए सुनीता विलियम्स ने बताया कि गुरुत्वाकर्षण के अभाव में पदार्थ, दवाइयों और यहां तक कि इंसानी व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिलता है। इसी तरह के अध्ययन विज्ञान को नई दिशा देते हैं और मानव शरीर को समझने में मदद करते हैं। यह व्याख्यान प्रो. वी.एन. वज़िरानी इंस्टीट्यूट लेक्चर श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें सुनीता विलियम्स पहली वक्ता रहीं। इस कार्यक्रम की स्थापना प्रो. वी.एन. वज़िरानी की स्मृति में उनके पुत्र विजय वज़िरानी और उमेश वज़िरानी ने की थी। कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के निदेशक, उप-निदेशक, डीन, शिक्षक, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। फायरसाइड चैट के दौरान, जिसका संचालन प्रो. शिल्पी शर्मा ने किया, सुनीता विलियम्स ने अपने बचपन और छात्र जीवन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क की भावना उन्हें खेलों और तैराकी से मिली, जिसने आगे चलकर अंतरिक्ष अभियानों में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अंतरिक्ष में भारतीय भोजन साझा करने का अनुभव भी बताया, जिसे उन्होंने भावुक और खुशी से भरा क्षण बताया। पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने ‘ओवरव्यू इफेक्ट’ का उल्लेख किया और कहा कि ऊपर से देखने पर सीमाएं बेमानी लगने लगती हैं और यह एहसास होता है कि हम सभी एक ही ग्रह के निवासी हैं। सुनीता विलियम्स का यह संबोधन आईआईटी दिल्ली के छात्रों के लिए केवल एक व्याख्यान नहीं, बल्कि विज्ञान, जीवन और मानव क्षमता को समझने की एक गहरी प्रेरणा बनकर सामने आया, जिसने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस दिया।

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