
कल्याण। इगतपुरी रेलवे स्टेशन पर केंद्रीय रेलवे विजिलेंस विभाग ने मंगलवार को एक बड़े सुरक्षा अभियान में नकली और अवैध वेंडरों के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में कुल 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो खुद को अधिकृत कैटरिंग स्टाफ बताकर यात्रियों और ट्रेनों के बीच बेरोकटोक घूम रहे थे। यह ऑपरेशन 13 जनवरी 2026 को अंजाम दिया गया, जिससे रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विजिलेंस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से मेसर्स ए.एच. व्हीलर और डोडामणि कैंटीन के जाली पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। इन फर्जी आईडी कार्डों के सहारे आरोपी प्लेटफॉर्म, ट्रेनों और स्टेशन के प्रतिबंधित क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच बना रहे थे। अधिकारी ने बताया कि ऐसे नकली वेंडर अक्सर चोरी, जेबकटी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए कवर के रूप में काम करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस टीम को इगतपुरी स्टेशन पर अवैध वेंडरों की सक्रियता को लेकर विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसी आधार पर एक विशेष टीम ने स्टेशन परिसर में अलग-अलग स्थानों पर अचानक छापेमारी की और सभी 28 आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा। जांच में पाया गया कि ये लोग बिना किसी वैध अनुमति के खाना बेच रहे थे और स्टेशन के संवेदनशील इलाकों में भी आवाजाही कर रहे थे। छापेमारी के बाद सभी आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए इगतपुरी रेलवे सुरक्षा बल को सौंप दिया गया है। इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि जीआरपी और आरपीएफ की मौजूदगी के बावजूद अवैध वेंडरों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नकली वेंडरों की मौजूदगी न सिर्फ वैध कैटरिंग ठेकेदारों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। रेलवे विजिलेंस विभाग ने संकेत दिया है कि इस कार्रवाई के बाद मुंबई-नासिक रेल कॉरिडोर के अन्य स्टेशनों पर भी इसी तरह के अभियान चलाए जा सकते हैं, ताकि नकली वेंडरों और उनसे जुड़े संभावित आपराधिक नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।




