Monday, January 12, 2026
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असम विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस का बड़ा दांव, प्रियंका गांधी बनी उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को असम में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करने वाली समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया है। रणनीतिकार के रूप में पहचानी जाने वाली प्रियंका गांधी पहली बार सीधे तौर पर किसी विधानसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह गांधी परिवार के किसी सदस्य के लिए भी पहली बार है।
असम में भाजपा को हराने की रणनीति में राहुल गांधी का बड़ा कदम
असम में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व पूरी ताकत झोंकता नजर आ रहा है। राहुल गांधी ने पहले अपने करीबी सहयोगी और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई को 2025 में असम कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। अब प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाकर उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से लड़ने जा रही है। गौरतलब है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अतीत में राहुल गांधी और गौरव गोगोई दोनों पर व्यक्तिगत हमले किए हैं, जिससे कांग्रेस नेतृत्व में नाराजगी रही है।
पारदर्शी और विवाद-मुक्त टिकट वितरण पर जोर
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी चाहते हैं कि असम में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी तरह के विवाद से दूर रहे। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर उठे विवादों से सबक लेते हुए पार्टी इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाए जाने से असम में टिकट वितरण को लेकर किसी भी तरह की गलती की संभावना न्यूनतम हो जाएगी और इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भरोसा भी बढ़ेगा।
असम कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसी भी चुनाव में उम्मीदवार चयन सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष के रूप में प्रियंका गांधी की नियुक्ति यह दर्शाती है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है।
5 से 20 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन, शर्तों के साथ टिकट दावेदारी
कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों से 5 जनवरी से 20 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन करने वालों को 50 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट संलग्न करना होगा। इसके साथ ही दावेदारों को यह लिखित आश्वासन भी देना होगा कि टिकट न मिलने की स्थिति में वे निर्दलीय या किसी अन्य पार्टी के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। असम कांग्रेस के प्रभारी सचिव मनोज चौहान ने बताया कि प्रियंका गांधी के नाम की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि मतदाताओं के बीच भी लोकप्रिय हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने असम में व्यापक प्रचार किया था।
2021 चुनावों में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं प्रियंका गांधी
2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रियंका गांधी ने असम के चाय बागानों में श्रमिकों से संवाद किया था और उनके साथ चाय की पत्तियां तोड़ी थीं। वह लखीमपुर में स्थानीय महिलाओं के साथ झुमुर नृत्य में भी शामिल हुई थीं। इसके अलावा उन्होंने लखीमपुर, तेजपुर, जोरहाट, नजीरा और गोलाघाट जिलों में जनसभाओं को संबोधित कर बेरोजगारी समेत कई मुद्दों पर भाजपा सरकार पर हमला बोला था।
स्क्रीनिंग कमेटी असम का करेगी दौरा
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, स्क्रीनिंग कमेटी में लोकसभा सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और एआईसीसी पदाधिकारी सिरिवेल्ला प्रसाद शामिल हैं। समिति जल्द ही असम का दौरा कर संभावित उम्मीदवारों के बारे में जमीनी स्तर पर फीडबैक लेगी। साथ ही आंतरिक सर्वेक्षणों को भी ध्यान में रखकर जिताऊ उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। शॉर्टलिस्ट किए गए नामों को राज्य इकाई से विचार-विमर्श के बाद सेंट्रल इलेक्शन कमेटी को भेजा जाएगा, जहां अंतिम रूप से उम्मीदवारों को मंजूरी दी जाएगी।
जीतने की क्षमता और विचारधारा होगी प्राथमिकता
मनोज चौहान ने कहा कि उम्मीदवार चयन में जीतने की क्षमता और पार्टी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता मुख्य मानक होंगे। इसके अलावा पार्टी कार्यक्रमों में उनके योगदान को भी महत्व दिया जाएगा। वहीं, एआईसीसी पदाधिकारी सिरिवेल्ला प्रसाद ने कहा कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में काम करना उनके लिए सम्मान की बात होगी।
कांग्रेस के लिए असम चुनाव बड़ी चुनौती
गौरतलब है कि कांग्रेस 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा से हार चुकी है। 2021 के चुनाव में पार्टी 126 में से केवल 29 सीटें जीत पाई थी, जबकि भाजपा ने 60 सीटों पर कब्जा किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को असम में केवल 3 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने 9 सीटें जीतीं। कांग्रेस इस बार भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर पर भरोसा कर रही है।

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