
पैन कार्ड का दुरुपयोग कर कर्नाटक में फर्जी कंपनियां रजिस्टर करने का आरोप
मुंबई। खार वेस्ट में रहने वाले 45 वर्षीय रमाकांत गोरे उस समय हैरान रह गए, जब उनकी पत्नी और बेटी के नाम पर कर्नाटक जीएसटी डिपार्टमेंट से लाखों रुपये के बकाया भुगतान के नोटिस पहुंचे। नोटिस में कुल 47.36 लाख रुपये की मांग की गई थी, जबकि गोरे परिवार का दावा है कि उन्होंने कर्नाटक में कभी कोई व्यवसाय नहीं किया।
पहले नोटिस के बाद पत्नी का अकाउंट और एफडी हुई फ्रीज
एफआईआर के मुताबिक, 19 जनवरी 2024 को रमाकांत गोरे की पत्नी सविता गोरे के नाम पर ‘मे गोरे ट्रेडर्स’ फर्म के लिए जीएसटी बकाया का नोटिस आया। इसके बाद 26 फरवरी 2024 को भुगतान न होने के कारण एसबीआई बैंक खाते पर कार्रवाई हुई, जिससे उनका करीब 6 लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य बैलेंस फ्रीज कर दिया गया।
परिवार के कर्नाटक जीएसटी कार्यालय से संपर्क करने के बाद यह अकाउंट बाद में अनफ्रीज किया गया।
दोबारा नोटिस, फिर फ्रीज हुए खाते
सितंबर 2024 में ‘मे वसंत ट्रेडर्स’ और ‘मे गोरे ट्रेडर्स’ के नाम से एक और नोटिस मिला, जिस पर सविता गोरे के कथित हस्ताक्षर थे। इसके बाद जीएसटी विभाग ने फिर से बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया। नवंबर 2025 में बेटी धनश्री गोरे का बैंक अकाउंट भी फ्रीज कर दिया गया और दिसंबर 2025 में परिवार को इनकम टैक्स विभाग से समन मिला। गोरे परिवार का कहना है कि न तो उन्होंने और न ही परिवार के किसी सदस्य ने कभी ‘गोरे ट्रेडर्स’ या ‘वसंत ट्रेडर्स’ के नाम से कोई बिजनेस शुरू किया। उनका आरोप है कि अज्ञात लोगों ने उनके पैन कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग कर बेंगलुरु में फर्जी कंपनियां रजिस्टर की हैं। इस पूरे मामले के कारण परिवार गंभीर आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
खार पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
शिकायत के आधार पर खार पुलिस ने 31 दिसंबर को अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) सहित अन्य प्रावधानों और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।




