
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव की पृष्ठभूमि में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में उम्मीदवारी को लेकर जारी खींचतान के बीच एबी फॉर्म से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रभाग क्रमांक 173 में एक बीजेपी इच्छुक उम्मीदवार पर असली एबी फॉर्म की जगह डुप्लीकेट यानी कलर जेरॉक्स फॉर्म जमा कराने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटनाक्रम से न केवल बीजेपी बल्कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन यानी महायुति में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
बीजेपी–शिवसेना गठबंधन और सीट बंटवारा
बीएमसी चुनाव के लिए बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने गठबंधन किया है। तय समझौते के अनुसार बीजेपी 137 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि शिवसेना शिंदे गुट को 90 सीटें मिली हैं। इसी सीट बंटवारे में वार्ड क्रमांक 173 शिवसेना शिंदे गुट के हिस्से में गया है। इस वार्ड से शिंदे गुट ने पूर्व नगरसेवक रामदास कांबले की पत्नी पूजा कांबले को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। इसके बावजूद बीजेपी की इच्छुक उम्मीदवार और बी.कॉम स्नातक शिल्पा केलूसकर ने नामांकन दाखिल कर दिया। आरोप है कि शिल्पा केलूसकर ने अपने नामांकन पत्र के साथ पार्टी का असली एबी फॉर्म न लगाकर उसका डुप्लीकेट कलर जेरॉक्स फॉर्म संलग्न किया। हैरानी की बात यह रही कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इस खामी को नजरअंदाज करते हुए नामांकन को वैध मान लिया। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शिवसेना (शिंदे गुट) की उम्मीदवार पूजा कांबले उसी वार्ड से नामांकन दाखिल करने पहुंचीं। एक ही वार्ड से महायुति के दो उम्मीदवारों के एबी फॉर्म सामने आने की जानकारी जैसे ही बीजेपी खेमे तक पहुंची, राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। शिंदे गुट की सीट पर बीजेपी की ओर से नामांकन स्वीकार होने से गठबंधन में गंभीर पेंच फंस गया है।
फोन बंद, बढ़ी सस्पेंस की स्थिति
नामांकन वैध घोषित होने के बाद शिल्पा केलूसकर के पति दत्ता केलूसकर का मोबाइल फोन अचानक बंद हो जाना और उनका संपर्क से बाहर हो जाना भी चर्चा का विषय बन गया है। इससे पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। फिलहाल महायुति के भीतर असहजता का माहौल है और बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्थिति संभालने में जुटे हुए हैं।
अमित साटम की चुनाव आयोग से शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने तुरंत हस्तक्षेप किया है। उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस कथित धांधली की जानकारी दी और शिल्पा केलूसकर का नामांकन रद्द करने की मांग की है। इस बीच यह दावा भी सामने आया है कि शिल्पा केलूसकर के पास शुरू में पार्टी की ओर से असली एबी फॉर्म दिया गया था। बाद में शिवसेना शिंदे गुट से गठबंधन होने के कारण पार्टी ने उनसे फॉर्म वापस ले लिया। आरोप है कि इससे पहले ही शिल्पा केलूसकर ने उस एबी फॉर्म की कलर कॉपी तैयार कर ली थी और उसी डुप्लीकेट को असली बताकर नामांकन के साथ जमा कर दिया। फिलहाल इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार है। लेकिन इतना तय है कि प्रभाग 173 का यह विवाद बीएमसी चुनाव से पहले महायुति के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर उभरा है।




