Tuesday, January 13, 2026
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वीर बाल दिवस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का संदेश: गुरुओं के शौर्य, बलिदान और मानवता के मार्ग को जीवन में उतारने का आह्वान

मुंबई। सिख पंथ के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्र साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और साहिबजादे बाबा फतेह सिंह (7 वर्ष) के अद्वितीय शौर्य और सर्वोच्च बलिदान की स्मृति में 26 दिसंबर को मनाए जाने वाले ‘वीर बाल दिवस’ के अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुओं द्वारा दिखाए गए मानवता, साहस, निष्ठा और धर्म की रक्षा के मार्ग को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। सायन स्थित गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर दरबार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वीर शहीद साहिबजादों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस और बलिदान भारतीय इतिहास को नई दिशा देने वाला है और यह प्रेरणा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सदैव बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए अपना शीश समर्पित करने वाले ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी और उनके संपूर्ण परिवार द्वारा देश, संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान इतिहास में अमर है, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी कोमल आयु में साहिबजादों की शहादत उस दौर की भयावह क्रूरता को दर्शाती है, लेकिन इतने महान बलिदानों के बावजूद गुरु गोबिंद सिंह जी कभी अपने उद्देश्य से विचलित नहीं हुए। सभी सिख गुरुओं ने धर्म की स्वतंत्रता, मानवीय मूल्यों और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च उदाहरण पूरी दुनिया के सामने रखा। कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा समिति की ओर से कीर्तन और कविता वाचन के माध्यम से साहिबजादों को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर विधायक प्रसाद लाड, विधायक तमिल सेल्वन, श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी समागम समिति के राज्यस्तरीय समन्वयक रामेश्वर नाईक, पंजाबी साहित्य अकादमी के कार्याध्यक्ष बल मलकित सिंह, गुरुद्वारा समिति के सदस्य दलजीत सिंह, गुरुदेव सिंह, जसपाल सिंह सिद्धू, हैप्पी सिंह, डॉ. अजय सिंह राठोड सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार जिनके बलिदान से हमारा अस्तित्व सुरक्षित है, उनका निरंतर स्मरण ही सफल और सुरक्षित भविष्य का मार्ग है, इसी भावना से साहिबजादों के शौर्य की स्मृति में वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस दिन गुरुओं और उनके परिवार के बलिदान को सामूहिक रूप से स्मरण कर मानवता की रक्षा के लिए तत्पर रहने और गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें, क्योंकि गुरुबाणी और गुरुओं के विचार आज भी जीवन को सन्मार्ग दिखाते हैं और मानवता की सेवा का सतत संदेश देते हैं।

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