
मुंबई। आगामी मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव एक साथ लड़ने की औपचारिक घोषणा कर दी है। बुधवार को मुंबई के एक होटल में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में ठाकरे बंधुओं ने मंच साझा करते हुए “हमेशा साथ रहने” का वादा किया और गठबंधन की घोषणा की।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहा था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिवसेना और मनसे अब एकजुट हैं और महाराष्ट्र के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा। राज ठाकरे ने यह भी घोषणा की कि मुंबई का मेयर मराठी ही होगा और वह या तो मनसे या शिवसेना (यूबीटी) से होगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अभी सिर्फ साथ मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की जा रही है, उम्मीदवारों और सीटों के बंटवारे का फैसला बाद में किया जाएगा। उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में मराठी अस्मिता पर जोर देते हुए कहा कि मराठी लोग सामान्य तौर पर किसी को परेशान नहीं करते, लेकिन अगर कोई उनके रास्ते में आता है तो उसे छोड़ा भी नहीं जाता। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान “बटेंगे तो कटेंगे” जैसे नारे दिए गए थे, लेकिन आज वह कहना चाहते हैं कि अगर मुंबईकर बंटेंगे तो नुकसान उठाना पड़ेगा। लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक राह पर चल रहे ठाकरे परिवार के दोनों प्रमुख नेताओं ने साझा मंच से यह संदेश दिया कि अब मतभेद पीछे छोड़कर मराठी स्वाभिमान, महाराष्ट्र की पहचान और अधिकारों की राजनीति को केंद्र में रखा जाएगा। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन केवल चुनावी गणित नहीं है, बल्कि एक वैचारिक और सांस्कृतिक एकजुटता है।
गठबंधन की घोषणा के साथ ही राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे भाइयों का एकजुट होना सत्तारूढ़ बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। खासतौर पर मुंबई, ठाणे, पुणे और मराठवाड़ा जैसे शहरी क्षेत्रों में यह गठबंधन वोटों के समीकरण को बदलने की क्षमता रखता है। राज ठाकरे ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में साझा न्यूनतम कार्यक्रम और सीट बंटवारे को लेकर विस्तृत रोडमैप पेश किया जाएगा। वहीं उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब महाराष्ट्र और मराठी मान-सम्मान की बात आती है, तो सभी राजनीतिक मतभेद स्वतः पीछे छूट जाते हैं। यह गठबंधन ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य में महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक फैसलों को लेकर जनता में असंतोष देखा जा रहा है। ऐसे में ठाकरे भाइयों की यह नई राजनीतिक केमिस्ट्री न केवल बीएमसी चुनाव, बल्कि आने वाले विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में भी महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदलने वाली मानी जा रही है।




