
बारामती। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे के कोरेगांव पार्क भूमि घोटाले से जुड़े विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित बताया है। रविवार को बारामती में मीडिया से बात करते हुए एनसीपी (अजित पवार गुट) प्रमुख ने कहा कि हर चुनाव से पहले उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जाते हैं, ताकि राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया जा सके। अजित पवार ने कहा, “चुनाव शुरू होते ही हम पर आरोप लगने लगते हैं। इससे पहले भी 70 करोड़ रुपये की अनियमितता के आरोप लगे थे। चाहे मेरे रिश्तेदार ही क्यों न हों, दबाव में जांच नहीं होनी चाहिए। अगर किसी ने गलत किया है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। मैंने अपने राजनीतिक जीवन में कोई गलत काम नहीं किया है। कथित कोरेगांव पार्क जमीन घोटाला मामले में हमारा एक भी रुपये का लेन-देन नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि मुंधवा की जमीन की कीमत 2003 में मात्र डेढ़ लाख रुपये थी, और जनता को जल्द ही इस मामले की सच्चाई पता चल जाएगी। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जांच चल रही है, और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। पवार ने रजिस्ट्रार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा- बिना एक रुपये के लेन-देन के सिर्फ संख्याएं लिखकर कागज कैसे तैयार किया जा सकता है? यह बात मुझे अब तक समझ नहीं आई है, इसलिए मैं भी इससे हैरान हूं। वहीं, पार्थ पवार ने अब तक इस पूरे विवाद पर कोई बयान नहीं दिया है। इस पर अजित पवार ने कहा, “पार्थ ने नहीं, बल्कि मैंने, उनके पिता ने, अपना पक्ष रखा है। झूठे आरोप मानहानि का कारण बनते हैं। अजित पवार ने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा, मैं हमेशा कहता हूं किसी दबाव में न आएं। मेरे रिश्तेदार, कार्यकर्ता या अधिकारी कोई भी ऐसा काम न करें जो नियमों के खिलाफ हो। क्लास वन, क्लास टू, आईएएस, आईपीएस सभी को कानून के अनुसार काम करना चाहिए। गौरतलब है कि हाल ही में पुणे के रजिस्ट्रेशन इंस्पेक्टर जनरल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र की 1800 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को मात्र 300 करोड़ रुपये में पार्थ पवार की कंपनी को बेचा गया, और इस सौदे पर सिर्फ 500 रुपये की स्टांप ड्यूटी अदा की गई। यह रिपोर्ट मुंबई के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई थी, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। अजित पवार ने कहा कि वे जांच से नहीं डरते, लेकिन उन्होंने दोहराया कि जांच निष्पक्ष, तथ्यों पर आधारित और किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होनी चाहिए।




