
13.45 करोड़ रुपये का ‘नशीला’ पदार्थ बरामद!
मुंबई। मुंबई पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डीसीपी समीर शेख ने अपराध के खिलाफ अपनी अटूट प्रतिबद्धता और समाज को नशे की गिरफ्त से मुक्त कराने के लिए किए गए सराहनीय प्रयासों से एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। हाल ही में, उनकी अगुवाई में मुंबई पुलिस ने पालघर जिले के वसई-नालासोपारा में छह महीने से चल रही एक गुप्त ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में 13.45 करोड़ रुपये से अधिक की मेफेड्रोन (एमडी) और नशीले पदार्थों के उत्पादन में उपयोग होने वाले उपकरण व कच्चे माल को जब्त किया गया। यह ऑपरेशन न केवल डीसीपी शेख की नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है, बल्कि समाज में बढ़ते नशे के खतरे के खिलाफ उनकी लड़ाई का एक शक्तिशाली प्रतीक भी है। डीसीपी समीर शेख के नेतृत्व में मुंबई पुलिस की एक विशेष टीम ने वसई-नालासोपारा में छापेमारी की। यह क्षेत्र लंबे समय से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार का केंद्र बनता जा रहा था, जो न केवल स्थानीय समुदाय बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा था। डीसीपी शेख ने इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक रणनीतिक योजना तैयार की। उनकी टीम ने सटीक समन्वय और सूझबूझ के साथ इस गुप्त फैक्ट्री का पर्दाफाश किया, जो छह महीनों से मेफेड्रोन जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों का उत्पादन कर रही थी। इस ऑपरेशन में भारी मात्रा में मेफेड्रोन, रासायनिक सामग्री और ड्रग्स उत्पादन के उपकरण जब्त किए गए, जिनकी कीमत 13.45 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। इस छापेमारी में फैक्ट्री के संचालक सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि चार अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। डीसीपी शेख की रणनीति और उनकी टीम की तत्परता ने इस बड़े ड्रग्स रैकेट को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्रवाई न केवल नशीले पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने में सफल रही, बल्कि समाज में नशे के बढ़ते प्रभाव को रोकने की दिशा में एक ठोस कदम भी साबित हुई। इस ऑपरेशन ने नशीले पदार्थों के कारोबारियों को सख्त संदेश दिया कि मुंबई पुलिस की पैनी नजर और कठोर कार्रवाई से कोई नहीं बच सकता। डीसीपी समीर शेख का नाम मुंबई पुलिस में कर्तव्यनिष्ठा, साहस और अपराध के खिलाफ कठोर कार्रवाई का पर्याय बन चुका है। उनकी कार्यशैली में सूचना का गहन विश्लेषण, रणनीतिक नियोजन और त्वरित कार्रवाई का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। नशे जैसे सामाजिक अभिशाप के खिलाफ उनकी यह लड़ाई केवल अपराधियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के युवाओं को इस दलदल से बचाने और एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखने का प्रयास भी है। डीसीपी शेख ने इस ऑपरेशन के माध्यम से न केवल एक बड़े ड्रग्स रैकेट का खुलासा किया, बल्कि समाज को यह विश्वास भी दिलाया कि पुलिस प्रशासन उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। आज का समाज, विशेष रूप से युवा पीढ़ी, नशीले पदार्थों की चपेट में तेजी से आ रही है। मेफेड्रोन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता चलन न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी कमजोर करता है। डीसीपी समीर शेख की इस कार्रवाई ने नशे की आपूर्ति को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। समाज को नशे से मुक्त करने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान, पुनर्वास कार्यक्रम और सामुदायिक सहयोग की भी आवश्यकता है। डीसीपी शेख जैसे अधिकारियों के प्रयास इस दिशा में एक प्रेरणा हैं, जो न केवल अपराधियों को पकड़ते हैं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए भी काम करते हैं। डीसीपी समीर शेख ने वसई-नालासोपारा ड्रग्स फैक्ट्री के खिलाफ अपनी हालिया कार्रवाई से यह साबित कर दिया है कि वे नशे और अपराध के खिलाफ जंग के सच्चे नायक हैं। उनकी सूझबूझ, साहस और नेतृत्व ने मुंबई पुलिस की कार्यकुशलता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यह कार्रवाई न केवल एक बड़े ड्रग्स रैकेट का अंत है, बल्कि समाज में नशे के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी है। डीसीपी समीर शेख और उनकी टीम की इस उपलब्धि के लिए उन्हें न केवल पुलिस महकमे, बल्कि पूरे समाज की ओर से अभिनंदन और सम्मान मिलना चाहिए। उनकी यह लड़ाई हमें प्रेरित करती है कि एकजुट प्रयासों से हम अपने समाज को नशे और अपराध से मुक्त कर सकते हैं।- इंद्र यादव/स्वतंत्र लेखक



