
वी बी माणिक
मुंबई। मेल और एक्सप्रेस गाड़ियों में अवैध हॉकर यात्रियों को घटिया व महंगे खाने का सामान बेच रहे हैं। सवाल यह है कि ये सामान कहाँ से आता है और किसके संरक्षण में बिकता है? शिकायत करने पर आरपीएफ अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय यात्रियों को “139 पर कॉल करो” कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। प्रयागराज, नैनी, सतना, कटनी, जबलपुर से लेकर इटारसी, खंडवा, भुसावल, जलगांव, मनमाड, नासिक, इगतपुरी, कल्याण, एलटीटी और सीएमएमटी तक इन अवैध वेंडरों का बोलबाला है। सीएसटी मेन लाइन पर रामनारायण और शाम कल्लू जैसे नामचीन लोग अपने गुर्गों से धड़ल्ले से समोसा-पानी-खाना बेचते हैं। यदि कोई यात्री शिकायत करता है तो कथित पत्रकार धमकाने पहुँच जाते हैं। पैंट्री कार भी यात्रियों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने में विफल है। जहाँ आरपीएफ हॉकरों पर ढीली है, वहीं जीआरपी मोबाइल चोरों पर “फिदा” है। रोजाना चोरी की घटनाएँ हो रही हैं, लेकिन चोर पकड़ में नहीं आते। शिकायत दर्ज होने के बाद महीनों तक थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, पर जाँच पूरी नहीं होती। यात्री अंततः हारकर भगवान भरोसे बैठ जाते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा राम भरोसे
रेलवे में दो-दो सुरक्षा एजेंसियाँ मौजूद होने के बावजूद यात्री दिन-ब-दिन असुरक्षित होते जा रहे हैं। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव रोज नए नारे और आश्वासन देते हैं, लेकिन यात्रियों को राहत नहीं मिल पा रही। आरपीएफ और जीआरपी को लाखों रुपये वेतन और सुविधाएँ मिलती हैं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वे नाकाम हैं। कभी-कभार एक-दो मामले सुलझने पर अधिकारी अपनी पीठ ऐसे थपथपाते हैं मानो बड़ा कारनामा कर दिया हो। हाल ही में आरपीएफ की नई डीजी सोनाली मिश्रा ने चार्ज संभाला है। 1992 बैच की आईपीएस अधिकारी मिश्रा 2026 में रिटायर होंगी। अब देखना यह है कि क्या वे भ्रष्टाचार और लापरवाही से ग्रस्त इस व्यवस्था पर नियंत्रण कर पाएंगी, या फिर यात्री यूँ ही असुरक्षित सफर करने को मजबूर रहेंगे।




