
मुंबई। न्यायमूर्ति योगेश कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली विशेष एसीबी अदालत ने सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड के निदेशक अमित प्रभाकर सालुंके को ज़मानत दे दी, जिससे उनकी एक महीने की न्यायिक हिरासत समाप्त हो गई। सालुंके को 24 जुलाई 2025 को आबकारी से संबंधित कथित अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र में विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था और मामला महत्वपूर्ण ‘108 एम्बुलेंस परियोजना’ तक जा पहुँचा। सालुंके की कानूनी टीम ने अदालत में तर्क दिया कि उनका नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं था, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्होंने जाँच में पूरा सहयोग किया। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि जाँच नोटिसों का अनुपालन करने के बावजूद अभियोजन पक्ष कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा, अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि मेरे मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। यह न्याय के हित में लिया गया निर्णय है, और मेरे मुवक्किल जाँच में सहयोग जारी रखेंगे। गंभीर आरोपों के बावजूद झारखंड पुलिस निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रही, जो अभियोजन सामग्री की कमी को दर्शाता है। सालुंके इस मामले में गुण-दोष के आधार पर ज़मानत पाने वाले पहले आरोपी बने हैं। अदालत ने ज़मानत देते समय मध्यम शर्तें और सख्त अनुपालन धाराएं लागू कीं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम न केवल गिरफ्तारी प्रक्रिया की खामियों को उजागर करता है, बल्कि अभियोजन पक्ष की कमजोरी को देखते हुए सालुंके को आगे चलकर क्लीन चिट मिलने की संभावना भी बढ़ा सकता है।