
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) के पदाधिकारी सूरज चव्हाण को कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों को खिचड़ी वितरण में हुए कथित घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में जमानत दे दी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने लॉकडाउन के दौरान फोर्स वन मल्टी सर्विसेज नामक कंपनी को खिचड़ी वितरण के लिए 8.64 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें से 3.64 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसमें से 1.25 करोड़ रुपये सूरज चव्हाण के बैंक खाते में और 10 लाख रुपये उनकी साझेदारी वाली फर्म फायर फाइटर्स एंटरप्राइजेज के खाते में ट्रांसफर किए गए। ईडी ने आरोप लगाया कि चव्हाण ने कुल 1.35 करोड़ रुपये की “अपराध की आय” अर्जित की, जिसका उपयोग उन्होंने संपत्ति खरीदने और डेयरी व्यवसाय में निवेश करने के लिए किया। चव्हाण को 17 जनवरी 2024 को ईडी ने गिरफ्तार किया था, और 9 सितंबर 2024 को विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर करते हुए कहा कि चव्हाण एक साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमा जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने यह भी माना कि चव्हाण वर्तमान में किसी प्रभावशाली पद पर नहीं हैं, जिससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना कम हो जाती है। अदालत ने शर्त लगाई कि चव्हाण को महीने में एक बार ईडी के सामने पेश होना होगा, मुकदमे में सहयोग करना होगा, कोर्ट की अनुमति के बिना महाराष्ट्र नहीं छोड़ सकते और पेशी के दौरान अदालत में उपस्थित रहना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन शर्तों का उल्लंघन हुआ तो अभियोजन पक्ष जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।




