
मुंबई। शहरी वृक्षों के वैज्ञानिक संरक्षण पर केंद्रित दूसरी अंतर्राष्ट्रीय आर्बोरीकल्चर (वृक्ष संरक्षण) परिषद 6 से 8 मार्च 2026 के बीच विले पार्ले (पूर्व) स्थित होटल सहारा स्टार में आयोजित की जाएगी। गुरुवार को परिषद के आयोजकों ने बताया कि विचार-मंथन से निकलने वाली सिफारिशें केंद्र और राज्य सरकार को नीति निर्धारण के लिए भेजी जाएंगी। नानाजी देशमुख प्रतिष्ठान के अध्यक्ष संजय पांडे और Arboriculture and Tree Conservation Association (ATCA) के संचालक वैभव राजे ने पत्रकार परिषद में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि मौजूदा पेड़ों का वैज्ञानिक संरक्षण समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्री की होगी उपस्थिति
परिषद का उद्घाटन महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे करेंगी, जबकि समापन समारोह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों होगा। नगर नियोजन विशेषज्ञों और देश-विदेश के आर्बोरीकल्चर विशेषज्ञों की प्रमुख भागीदारी इस सम्मेलन में रहेगी।
वैज्ञानिक तकनीक नीति-निर्माण तक पहुंचेगी
संजय पांडे ने कहा कि इस परिषद का उद्देश्य आर्बोरीकल्चर की वैज्ञानिक तकनीकों को नीति-निर्माण प्रक्रिया तक पहुंचाना है, ताकि तेजी से हो रहे शहरी विकास को हरित और पर्यावरण-संतुलित स्वरूप दिया जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
परिषद में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित विभिन्न देशों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। इनमें कार्ल डल्ला रिवा (निदेशक, बोर्ड ऑफ आर्बोरीकल्चर, ऑस्ट्रेलिया), डैन लैम्बे (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आर्बर डे फाउंडेशन, यूएसए), और जेसिका सैंडर्स (कार्यकारी निदेशक, सैक्रामेंटो ट्री फाउंडेशन, यूएसए) शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. संग्राम चव्हाण (वरिष्ठ वैज्ञानिक, राष्ट्रीय अजैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, बारामती), डॉ. प्राची गुप्ता (प्रोफेसर, अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु), व्योम भट्ट (सह-संस्थापक, श्रूमसभा) तथा वास्तुकार शिल्पा गवाणे (संस्थापक, ट्रीज ऑफ अहमदाबाद) परिषद में अपने विचार साझा करेंगे।
आर्बोरीकल्चर इम्पैक्ट सर्वेक्षण पर जोर
वैभव राजे ने कहा कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव आकलन तो किया जाता है, लेकिन मौजूदा वृक्षों के संरक्षण के लिए ‘आर्बोरीकल्चर इम्पैक्ट सर्वेक्षण’ को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। पश्चिमी देशों में ऐसे सर्वेक्षण के बिना परियोजनाएं आगे नहीं बढ़तीं। भारत में भी शहरी विकास को हरित दिशा देने के लिए नीतिगत स्तर पर व्यापक बदलाव आवश्यक हैं। तीन दिनों तक चलने वाली इस परिषद में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा, केस स्टडी प्रस्तुतियां और नीति-आधारित सिफारिशों पर मंथन किया जाएगा। इसमें राज्य और देश की महानगरपालिकाओं, हवाई अड्डा डेवलपर्स और रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। आयोजकों के अनुसार, परिषद का मुख्य उद्देश्य शहरी वृक्षों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और उसे प्रशासनिक तथा नीतिगत ढांचे में शामिल कराना है, ताकि भविष्य के शहर अधिक हरित और पर्यावरण-अनुकूल बन सकें।




