
पुणे। पुणे का वैष्णवी हगावने आत्महत्या मामला राज्य के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक बन गया है। सोमवार (14 जुलाई) को बावधान पुलिस ने 58 दिनों की गहन जांच के बाद पुणे की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट आलिया बागल की अदालत में 11 आरोपियों के खिलाफ 1670 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस को सभी आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत मिले हैं। गौरतलब है कि वैष्णवी के ससुर राजेंद्र हगावने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के पदाधिकारी हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ गया। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने वैष्णवी के चरित्र पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि ‘उनका झुकाव आत्महत्या की ओर था’ और ‘एक व्यक्ति के साथ उनकी चैट में यह बात सामने आई है कि उन्होंने पहले भी आत्महत्या की कोशिश की थी’। हालांकि पुलिस जांच में इन दावों को खारिज कर दिया गया और आरोपियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए। वर्तमान में पांच आरोपी जमानत पर हैं जबकि छह न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता के कारण विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार किया है। चूंकि इस प्रकरण ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, इसलिए इसकी गूंज मंगलवार को विधानसभा के मानसून सत्र में सुनाई देने की संभावना है।




