Thursday, March 19, 2026
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अजित पवार का सख्त फैसला: छावा कार्यकर्ताओं से मारपीट पर एनसीपी युवा अध्यक्ष सूरज चव्हाण से इस्तीफा देने को कहा

मुंबई। लातूर में छावा संगठन के कार्यकर्ताओं से एनसीपी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई मारपीट की घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रमुख अजीत पवार ने सोमवार को एनसीपी युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष सूरज चव्हाण से तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने को कहा। रविवार को लातूर में हुई इस घटना के बाद अजीत पवार ने इसे “बेहद गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी के मूल्यों के खिलाफ किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल, छावा संगठन के कार्यकर्ता महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। कारण था एक वायरल वीडियो जिसमें मंत्री को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मोबाइल पर रम्मी खेलते देखा गया। एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने यह वीडियो साझा किया था। विरोध के दौरान छावा नेता विजय घाटगे ने लातूर में एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके सामने ताश के पत्ते फेंक दिए, जिससे तनाव बढ़ गया। इसके बाद एनसीपी कार्यकर्ताओं ने घाटगे और अन्य छावा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, जिसे टीवी चैनलों ने भी दिखाया। पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। बाद में मीडिया से बात करते हुए एनसीपी युवा प्रमुख सूरज चव्हाण ने स्वीकार किया कि उनके कार्यकर्ताओं ने “आपा खो दिया” क्योंकि छावा के नेताओं ने एनसीपी नेताओं के खिलाफ अपशब्द कहे। लेकिन इस स्वीकारोक्ति के बावजूद, अजीत पवार ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए चव्हाण से इस्तीफा देने को कहा। अजित पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “यह सख़्त निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि पार्टी के मूल्यों के ख़िलाफ़ जाने वाला व्यवहार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लोकतांत्रिक, समतावादी और भ्रातृत्व के आदर्शों पर आधारित है।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक जीवन में अहिंसा, शांति और अनुशासन को प्राथमिकता देने की अपील की। यह घटना न सिर्फ राजनीतिक मर्यादाओं की परीक्षा बन गई है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सत्ता पक्ष में होने के बावजूद अजीत पवार अपने संगठन में अनुशासन और सार्वजनिक जवाबदेही के सिद्धांतों को लेकर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

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