
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदृष्टिपूर्ण सोच से प्रेरित ‘गादमुक्त बांध, गादयुक्त खेत’ योजना महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के सतत प्रबंधन और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन गई है। इस योजना का उद्देश्य जलाशयों और बांधों में जमा गाद को वैज्ञानिक तरीके से निकालकर खेतों में उपयोग करना है, जिससे जल भंडारण क्षमता में वृद्धि होती है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में भी सुधार आता है। यह विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।
सरकार की यह पहल सीमित संसाधनों वाले किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग का अवसर प्रदान करती है। गाद में मौजूद पोषक तत्वों के कारण खेतों की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे किसानों की आय में सीधा लाभ होता है। योजना के अंतर्गत बांधों, बंधारों और तालाबों से गाद निकालकर आसपास के खेतों में डाला जा रहा है, और इसके लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जा रही है। 1 अप्रैल 2024 से 7 अप्रैल 2025 के बीच राज्यभर में 1274 स्थानों पर 66.91 करोड़ घनमीटर गाद निकालने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें से अब तक 42.29 करोड़ घनमीटर गाद निकाली जा चुकी है। जो कि कुल लक्ष्य का 63प्रतिशत है। यह सफलता प्रशासन की सक्रियता और किसानों की सहभागिता के कारण संभव हो सकी है। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 2,781.8 करोड़ रूपए की निधि स्वीकृत की है, जिसमें से 1,549.9 करोड़ रूपए की राशि पहले ही वितरित की जा चुकी है। अब तक 35,205 पंजीकृत किसानों में से 31,719 किसान अनुदान के लिए पात्र पाए गए हैं, जिन्होंने 34.17 करोड़ घनमीटर गाद निकालने का कार्य किया है। इसके बदले 1,221.6 करोड़ रूपए का अनुदान तय किया गया, जिसमें से 512.4 करोड़ रूपए की राशि वितरित की जा चुकी है। अब तक 10.06 लाख एकड़ भूमि पर पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी डाली जा चुकी है, जिससे न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ी है, बल्कि सतत कृषि की दिशा में भी यह एक बड़ा कदम सिद्ध हुआ है। इस योजना ने छोटे किसानों को उनकी भूमि को पुनः उपजाऊ बनाने का अवसर प्रदान किया है। 2016 में इस योजना की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा था, “यह योजना केवल गाद निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, भूमि उर्वरता और किसानों की समृद्धि की कहानी है।” आज जब राज्य के लाखों किसान इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि मुख्यमंत्री की यह सोच न केवल दूरदर्शी थी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली भी है। ‘गादमुक्त बांध, गादयुक्त खेत’ अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महाराष्ट्र के आर्थिक और पर्यावरणीय उत्थान की प्रेरणा बन चुकी है।




